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Saturday, December 13, 2025

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गौसेवा में सदैव अग्रणी: बाबूजी कैलाश सोनी का मानवीय प्रयास

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नरसिंहपुर/करेली।
नगर में बेसहारा और घायल गौवंश की सेवा के लिए पूर्व राज्यसभा सांसद बाबूजी कैलाश सोनी हमेशा अग्रसर रहते हैं। हाल ही में करेली नगर में एक घायल गाय, जिसके कान में गंभीर घाव था, सड़क किनारे तड़पती मिली।
घटना की जानकारी मिलते ही बाबूजी ने पशु चिकित्सक एवं मानद पशु कल्याण प्रतिनिधि प्रदेश जीसीसीआई भागीरथ तिवारी को फोन कर मौके पर बुलाया। तिवारी तुरंत अपनी टीम — गौसेवक छोटू पटेल, साबिर खान, मुकेश पंडा, आकाश पटेल, कमलेश आदि के साथ पहुंचे। मौके पर गाय का इलाज किया गया और उसे सुरक्षित स्थल पर पहुंचाया गया, जहां उसके स्वास्थ्य लाभ तक देखभाल की जाएगी।

बाबूजी का गौमाता से गहरा लगाव

बाबूजी कैलाश सोनी का गौसेवा से गहरा जुड़ाव है। जब वे तपस्या कर्तव्य भवन में थे, तो पर्याप्त जगह होने पर उन्होंने गायों को आश्रय दिया, उनका पूजन किया और स्वयं भी उनकी देखभाल की। वे जानते हैं कि गाय न केवल धार्मिक दृष्टि से पवित्र है बल्कि कृषि, दुग्ध उत्पादन, गोबर और गौमूत्र जैसे अनेक उपयोगी संसाधनों का स्रोत भी है।
उनका स्पष्ट संदेश है —

“यदि गाय एक बार आपके घर के आंगन में बंध जाए तो मृत्यु पर्यन्त उसकी सेवा करें, उसे बेसहारा न छोड़ें।”

गौवंश की सुरक्षा में लापरवाही

दुर्भाग्य से, नगर पालिका और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा गौवंश की सुरक्षा में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। घायल या बेसहारा गायों को सुरक्षित स्थल पहुंचाने के बजाय अक्सर एकांत स्थानों पर छोड़ दिया जाता है, जिससे गौतस्कर उन्हें क्रूरता से ट्रकों में भरकर ले जाते हैं।
गौशालाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है — कई जगह गायें भूख-प्यास से तड़प रही हैं।

जनप्रतिनिधियों की उदासीनता

करेली नगर पालिका में पूरे 15 पार्षद भाजपा के होने के बावजूद गौवंश संरक्षण के प्रति कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देशों की भी अनदेखी हो रही है। जो लोग सक्रिय होकर गायों की सेवा करते हैं, उन्हें प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जबकि चरनोई भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को रोकने में भी कोताही बरती जा रही है।

📌 निष्कर्ष
गौवंश की सेवा केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं बल्कि मानवीय जिम्मेदारी भी है। बाबूजी कैलाश सोनी जैसे लोग समाज के लिए प्रेरणा हैं, लेकिन जब तक प्रशासन और जनप्रतिनिधि सक्रिय नहीं होंगे, तब तक बेसहारा और घायल गायों की स्थिति में सुधार संभव नहीं।

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