वाग्दत्ता साहित्य समिति की काव्य गोष्ठी में गूंजे देशभक्ति के तरन्नुम और शायरी

वाग्दत्ता साहित्य समिति की काव्य गोष्ठी में गूंजे देशभक्ति के तरन्नुम और शायरी

जितना अच्छा सोच रहे हो, उतना अच्छा दौर नहीं है..वाग्दत्ता साहित्य समिति की काव्य गोष्ठी में जमा देशभक्ति का रंग..करेली..किनारा छोड़ दिया तूने ताव मे आकर, गया न जान से आखिर बहाव में आकर..भारत का मिटने का शबब देखेंगे बाद में, देखेंगे पहले देश में गद्दार कितने है..वर्तमान परिदृश्य पर जब अश्आर जनाब मुख्तार नादिर जबलपुरी ने पेश किए तो तमाम महफिल में तालियां गूंज उठी। नगर की सामाजिक साहित्यिक संस्था वाग्दत्ता साहित्य समिति द्वारा मासिक काव्य गोष्ठी के तहत गत दिवस नगर के वरिष्ठ सेवानिवृत शासकीय अधिकारी राकेश जैन के निवास मालपानी नगर में रंगारंग काव्य गोष्ठी का आयोजन नागपुर महाराष्ट्र के प्रसिद्ध शायर जनाब शकील फिरदौसी, छिंदवाड़ा के अजमेरा मयकश,वरिष्ठ गीतकार दादा बाबूलाल दुबे, माते कालीदास बघेल प्रेम के सारस्वत आतिथ्य मे आयोजित हुई। अतिथि स्वागत मोतीमाला तिलकाभिनंदन से किया गया। माँ शारदे की पावन वंदना कवियत्री श्रीमती श्रद्धा दुबे ने की। ततपश्चात कविता पाठ का क्रम देर रात्रि तक चलता रहा। गोष्ठी में स्थानीय रचनाकार अंशुल श्रीवास्तव नादान ने कहा कि जीने का कोई तौर नहीं है, करता कोई गौर नहीं है, जितना अच्छा सोच रहे हो, उतना अच्छा दौर नहीं है..रचना प्रस्तुत की।शैलेन्द्र बिल्थरे ने बचपन की यादो शीर्षक से काव्य रचना का पाठ किया। दिग्विजय राजपूत ने आते जाते रास्ते भूल जाता हूँ, कहा जाता, क्यूँ जाता, समझ कुछ नहीं पाता हूँ.. पेश की। शिक्षिका व कवियत्री श्रीमती रजनी नेमा ने करेली के गौरव दिवस पर कविता गौरव दिवस बापू के सपनों का भारत निशदिन तरक्की कर रहा, सपने होते सच, नगर गौरव दिवस मना रहा.. प्रस्तुति दी। राँकई से पधारे जनाब अब्दुल गफ्फार भारती ने तरन्नुम के हवाले से गीत गज़ल सुनाकर रंग जमाया आपने…गफ्फार गज़ल अपनी तरन्नुम मे सुनाओ, महफिल में कोई तेरा कद्रदान हो न हो..गज़ल की शानदार पेशगी की। बक्सर बिहार के राजीव नयन ने जीवन की राह शीर्षक कविता राष्ट्र हित की साधना में हम करें सर्वस्व अर्पण.. रचना पाठ किया। कवियत्री श्रीमती श्रद्धा दुबे ने गुरु के मन की गहराई अब तक न कोई जान पाया है, एकलव्य को इतिहास पुरूष बनाया है..रचना प्रस्तुत की। दादा शील दुबे बेहतर ने गज़ल एक दिन जायदाद को लेकर सभी लड़ने लगे, देर तक सोया तो बेटे फातिहा पढ़ने लगे..पेश की।गोष्ठी का कुशल संचालन कर रहे युवा रचनाकार अमित जैन संजय ने इस सफर में जिंदगी पत्थर तो देखें है बहुत, अब गुजारिश फूलों का बरसात होना चाहिए.. गज़ल प्रस्तुत की। छिंदवाड़ा के अजमेरा मयकश ने गुनगुनाते हुए गज़ल देश पे मर मिटने का जज्बा कल भी था और आज भी है, मेरे वतन से मेरा रिश्ता कल भी था और आज भी है.. रचना सुनाकर देशप्रेम की बयार छोड़ी। नागपुर के शकील फिरदौसी ने मेरी खुद्दारी है, मेरा गुरूर थोड़ी है, हूँ व सऊर तो मेरा कुसुर थोड़ी है..कविता पेश की। वरिष्ठ कवि माते कालीदास बघेल प्रेम ने बतौर खुशबू खुद ब खुद बयां हूँ, पैगामे मुहब्बत का बढ़ता कारवां हूँ.. गज़ल सुनाकर तालियां बटोरी। नगर के वरिष्ठ गीतकार बाबूलाल दुबे ने अपनी गज़लों से समां बाँधा आपने नयन कमल मधु लेने को जब अलक पलक तक आती है, गोरे अव गुंठल मे फंसकर, प्यासी ही रह जाती हैं.. पेश की। देर रात्रि तक चली काव्य वर्षा का आभार राकेश जैन ने किया। इस मौके पर अनूप जैन, डाँ. विनय विश्वकर्मा, आकाश दुबे, कल्पना जैन, सरोज धुर्वे सहित श्रोताओं की उपस्थिति रही।फोटो..1,2

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