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Saturday, December 13, 2025

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हिन्दी पखवाड़ा के अंतर्गत स्मृति प्रसंग डॉ प्रकाश चन्द्र डोंगरे कार्यक्रम साखी साहित्य परिषद करेली के तत्त्वावधान में आयोजित किया गया कवि गोष्ठी व सम्मेलन

हिन्दी पखवाड़ा के अंतर्गत स्मृति प्रसंग डॉ प्रकाश चन्द्र डोंगरे कार्यक्रम साखी साहित्य परिषद करेली के तत्त्वावधान में आयोजित किया गया कवि गोष्ठी व सम्मेलन. चौदह सितंबर की शाम पंडित ताराचंद जी पाराशर ने हिंदी की यात्रा पर अपने विचार रखे दूसरे दिन पंडित विद्या प्रसाद शर्मा वृद्ध सामुदायिक सदन में राज्य सभा के पूर्व सांसद काव्यानुरागी माननीय कैलाश जी सोनी के मुख्य आतिथ्य,इंजी जवाहर सिंह चौहान की अध्यक्षता व सत्यप्रकाश पेठिया व पं ताराचंद जी पाराशर के विशिष्ट आतिथ्य में विमर्श डॉ प्रकाश चन्द्र डोंगरे के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रोफेसर माधव श्रीवास्तव व मुख्य अतिथि कैलाश सोनी ने डोंगरे जी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर विस्तृत चर्चा करते हुए उनके विनोदी आत्मीय और गंभीर स्वभाव की व्याख्या करते हुए उन्हें व्यंग्य कवि निरूपित किया। सर्व प्रथम अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथियों का स्वागत परिषद के सदस्यों ने पुष्प मालाओं द्वारा किया गया। दूसरे चरण में बारी थी कविताओं की ।

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विद्वान श्रोताओं से खचाखच भरे सभागार में प्रभावी कवि अभय तिवारी जबलपुर ने ‘ हर सुबह सुहानी है प्यारे हर शाम सुहानी सुहानी होती है ‘ जैसे नव गीत सुनाकर कवि गोष्ठी को महत्ता प्रदान की। इसी तरह सुधीर पांडे जबलपुर ने ‘उसकी नेमत की गंगा में रोज नहाओ मस्त रहो,अंतर की हर कालिख प्यारे यूं धो जाओ मस्त रहो ‘ प्रभावी काव्य पाठ किया। कविता सुनाकर सोहन परोहा जबलपुर ने काव्य पाठ की शुरुआत में बेहतरीन गीत ‘ अरे मन चल तो तू इक बार, पुच्छल तारे की पूंछ पकड़ कर घूमें हम संसार ‘ सुनाकर वाहवाही लूटी। जबलपुर से ही पधारे सलीम अंसारी ने गजल पेश करते हुए ‘तुम्हारे शहर का किरदार बेच सकते हैं, हमारे शहर के अखबार बेचने वाले ‘ तालियां बटोरी, सोहागपुर के कवि प्रबुद्ध दुबे ने ‘ मां मेरी गुहार है, मुझको ये उपहार दो, जिंदगी ना चाहिए मौत का अधिकार दो’ गीत सुनाया।शरद व्यास भोपाल ने ‘हरे भरे गीतों की माला सावन में पहनाऊं, तुम भी झूमो मैं भी झूमूं ऐसे गीत सुनाऊं ‘ गीत सुनाया तो पंडित राजेन्द्र सहारिया सोहागपुर ने अपने बुंदेली गीत सुनाये ‘ तूने कैसे कैसे दरद बनाए राम जी, तोहे कैसे कैसे दुख मन भाए राम जी ‘।

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इसी प्रकार गोष्ठी में सतीश सरस मोहद, शब्बीर उस्मानी नरसिंहपुर, माते कालीदास बघेल प्रेम, शंकरपाल चौहान, खलील करेलवी एवं संचालक नारायण श्रीवास्तव करेली ने भी काव्य पाठ किया। उल्लेखनीय कार्यक्रम में प्रबुद्ध श्रोताओं की अंतरंग उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

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