करेली ,
पूरे देश में अपने ख्यातिप्राप्त गुड की सुगंध और स्वाद का जलवा बिखेरने वाले
प्राकृतिक गुड की चमक अब पारंपरिक पद्धति छोड़ व्यवसायिक हो गई है , बाहर से आए बहुलांश गुड निर्माता ठेकेदार अब किसानों की भट्ठियां किराए पर लेकर अमानक गुड का निर्माण कर रहे हैं ,
गुड का रंग निखारने हेतु इनके द्वारा जिन केमिकलों का प्रयोग
किया जाता है वे स्वास्थ्य के लिए कितनी घातक हैं यह जाने बगैर लोग
बेधड़क यह गुड इस्तेमाल कर रहे हैं ,
स्वदेश की टीम ने इन गुड भट्ठियों का चुपचाप जायजा लेकर पड़ताल की तो इसके परिणाम
चौंकाने वाले थे ,
भट्ठियों पर फैली ,
गंदगी , भयावह प्रदूषण बिखेरती भट्ठियां जिन में ईंधन झोंकते नाबालिग और गंदी टंकियों में निकलता रस , रस को खोलने
के बाद उससे हटाए गए मरी नाम के अवशेष से भरे थैलों से टपकता बूंद बूंद रस अमानक निर्माण की कहानी खुद बयां कर रहा था , ये भट्ठियां किसानों से किराए पर लेकर यू पी के ठेकेदार या स्थानीय व्यापारी बड़े पैमाने पर गुड उत्पादन करते हैं और तैयार गुड पूरे देश में जाता है , इस अमानक गुड निर्माण पर शिकायत करने के बाद खाद्य विभाग के जिम्मेवार एकाध दो भट्टी वालों पर कागजी कार्यवाही और कुछ से वसूली करके अपने कर्तव्य की इतिश्री कर देते हैं , पूरे जिले में बेखौफ चल रही इन व्यवसायिक भट्ठियों पर अनेक जगह कार्यरत नाबालिग श्रमिकों की तरफ श्रम विभाग की नजर जाती नहीं या कि नजराने के चलते कृपा बरसती रहती है यह राम जाने , और इस क्षेत्र
की फूड विभाग के
अधिकारी तो मालगुजार हैं ,
अब इस व्यवस्था को सुधारे कौन ,
कृषक प्रधान जिले का अन्नदाता किसान या तो यूरिया की लाइन में
खड़ा है या शुगर मिल माफिया गैंग की देर से चालू मिल में अपनी गन्ने की ट्रॉली लिए कड़कड़ाती ठंड में एक दो रात से तपस्यारत है ,
कुल जमा व्यापारी तंत्र और लूट गैंग की बल्ले बल्ले और अधिकारी तंत्र की अंगुलिया घी में सर कढ़ाई में ,

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